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समय (Time) और अवसर (Opportunity) किसी का इंतज़ार नहीं करते। अक्सर हमें लगता है कि "अभी तो बहुत वक्त है, कल कर लेंगे।" लेकिन जब मुसीबत सिर पर आ पड़ती है, तब हमारी सारी होशियारी धरी की धरी रह जाती है। इसी को कहते हैं—अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। यह कहानी 'दण्डक वन' के दो शक्तिशाली जानवरों की है—एक शेरा (शेर) जो दूरदर्शी था, और एक रफ़्तार (तेंदुआ) जिसे अपनी फुर्ती पर घमंड था। एक भयानक तूफान ने कैसे रफ़्तार का घमंड तोड़ा, यह पढ़कर आपको समय की कीमत समझ आएगी।
कहानी: तूफान से पहले की शांति
शेरा की चेतावनी और रफ़्तार का घमंड
दण्डक वन में गर्मी का मौसम खत्म होने वाला था। हवा में नमी आ गई थी और आसमान का रंग बदलने लगा था। जंगल का राजा, शेरा सिंह, बहुत अनुभवी था। उसने हवा की गंध सूंघी और समझ गया कि इस बार मानसून कोई साधारण बारिश नहीं, बल्कि एक भयानक तूफ़ान लेकर आ रहा है।
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शेरा ने तुरंत तैयारी शुरू कर दी। उसने 'काली पहाड़ी' के ऊपर एक सुरक्षित गुफा ढूँढी, जो बाढ़ के पानी से ऊँची थी। उसने गुफा के मुहाने को पत्थरों से ढकना शुरू किया ताकि तेज़ हवा अंदर न आ सके।
वहीं दूसरी ओर, रफ़्तार नाम का तेंदुआ था। वह जंगल का सबसे तेज़ धावक था। वह दिन भर पेड़ों पर लेटकर आराम करता या छोटे जानवरों को डराकर मज़े लेता। जब उसने शेरा को मेहनत करते देखा, तो हँसा। "अरे शेरा काका! क्यों बुढ़ापे में इतनी मेहनत कर रहे हो? बारिश ही तो है, कोई आसमान थोड़ी गिर रहा है?"
शेरा ने गंभीरता से कहा, "रफ़्तार, हवा का रुख देख। यह तूफ़ान भारी तबाही लाएगा। नीचे की ज़मीन डूब जाएगी। समय रहते तुम भी कोई ऊँची और सुरक्षित गुफा ढूँढ़ लो।"
रफ़्तार ने अपनी मूंछों पर ताव दिया। "काका, आप भूल रहे हैं, मैं रफ़्तार हूँ। जब बारिश शुरू होगी, तो मैं हवा से भी तेज़ भागकर पहाड़ी पर चढ़ जाऊंगा। मुझे पहले से तैयारी करने की क्या ज़रूरत? मैं आपकी तरह बूढ़ा और धीमा थोड़ी हूँ।" शेरा ने सिर हिलाया, "बेटा, कुदरत की मार से रफ़्तार नहीं, समझदारी बचाती है।"
कुदरत का कहर
दो दिन बाद, मौसम ने करवट ली। दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया। पक्षी अपने घोंसलों में दुबक गए। जंगल में सन्नाटा पसर गया—तूफान आने से पहले की शांति।
रफ़्तार अभी भी एक नीचे वाले पेड़ की डाल पर लेटा हुआ था। "अरे, अभी तो सिर्फ़ बादल हैं," उसने सोचा।
तभी अचानक—गड़गड़ाहट! आसमान फटा और ऐसी मूसलाधार बारिश शुरू हुई जैसी जंगल ने बरसों से नहीं देखी थी। बारिश के साथ-साथ तूफानी हवाएं चलने लगीं। पेड़ों की डालियां टूटने लगीं। देखते ही देखते, जंगल के निचले हिस्से में नदी का पानी भरने लगा। बाढ़ आ गई थी।
रफ़्तार की लाचारी
रफ़्तार हड़बड़ाकर उठा। पानी उसके पेड़ के तने तक पहुँच चुका था। "मुझे पहाड़ी पर जाना होगा!" उसने सोचा। वह पेड़ से कूदा, लेकिन ज़मीन अब ज़मीन नहीं थी—वह कीचड़ का दलदल बन चुकी थी। रफ़्तार ने दौड़ने की कोशिश की, लेकिन उसके पैर कीचड़ में धंसने लगे। जिस रफ़्तार (Speed) पर उसे घमंड था, वह कीचड़ में बेकार हो गई।
तेज़ हवा के थपेड़ों ने उसे एक चट्टान से टकरा दिया। उसके पैर में चोट लग गई। पानी का स्तर बढ़ता जा रहा था। रफ़्तार दर्द से कराहता हुआ किसी तरह लंगड़ाकर एक ऊँचे पत्थर पर चढ़ गया। वह भीगकर कांप रहा था। ठंड उसकी हड्डियों तक पहुँच रही थी। उसे सामने दिखाई दे रही 'काली पहाड़ी' अब मीलों दूर लग रही थी।
शेरा का सुरक्षित ठिकाना
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ऊपर पहाड़ी पर, शेरा अपनी सूखी और गर्म गुफा में बैठा था। उसने पहले ही शिकार करके भोजन जमा कर लिया था। वह सुरक्षित था। उसने नीचे देखा। उसे रफ़्तार एक पत्थर पर सिकुड़ा हुआ, कांपता हुआ दिखाई दिया। पानी रफ़्तार के पत्थर को डुबोने ही वाला था।
शेरा को दया आ गई। लेकिन तूफ़ान इतना तेज़ था कि वह नीचे नहीं जा सकता था। रफ़्तार ने ऊपर देखा। उसकी आँखों में आंसू और पछतावा था। उसने चिल्लाकर कहा, "काका! मुझे बचा लो! मुझसे गलती हो गई!"
लेकिन आवाज़ हवा में गुम हो गई। रफ़्तार को पूरी रात उस तूफ़ान में, भीगते हुए, भूखे-प्यासे और डर के साये में गुज़ारनी पड़ी। उसे अपनी एक-एक बात याद आ रही थी—"मैं हवा से तेज़ भाग लूंगा।" अब उसे समझ आ रहा था कि रफ़्तार सिर्फ़ सूखी ज़मीन पर काम आती है, मुसीबत के कीचड़ में नहीं।
पछतावे का सवेरा
अगली सुबह, तूफ़ान थमा। पानी थोड़ा कम हुआ। रफ़्तार, जो अब तक अधमरा हो चुका था, किसी तरह गिरते-पड़ते पहाड़ी तक पहुँचा। शेरा गुफा के बाहर खड़ा था।
रफ़्तार ने शेरा के पैरों में गिरकर कहा, "काका, आप सही थे। अगर मैंने समय रहते तैयारी की होती, तो आज मेरी यह हालत न होती।"
शेरा ने उसे सहारा देकर उठाया और कहा, "रफ़्तार, अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत। जो नुकसान होना था, वो हो गया। शुक्र मनाओ कि जान बच गई। याद रखना, कल की सुरक्षा के लिए तैयारी आज ही करनी पड़ती है।"
रफ़्तार ने उस दिन कसम खाई कि वह कभी आज का काम कल पर नहीं टालेगा और अपनी रफ़्तार से ज़्यादा अपनी अक्ल पर भरोसा करेगा।
निष्कर्ष: समय की कीमत
रफ़्तार की यह कहानी हमें सिखाती है कि प्रकृति और समय किसी के लिए नहीं रुकते। जो समय का सम्मान नहीं करता, उसे अंत में रफ़्तार जैसा ही दुःख उठाना पड़ता है।
इस कहानी से सीख (Moral)
इस कहानी से हमें यह महत्वपूर्ण सीख मिलती है:
पूर्व-तैयारी (Preparation): मुसीबत आने का इंतज़ार मत करो, उससे निपटने की तैयारी पहले ही कर लो।
घमंड का त्याग: अपनी ताकत पर इतना घमंड मत करो कि बड़ों की सही सलाह भी बेकार लगने लगे।
Wikipedia Link
अधिक जानकारी के लिए देखें: समय प्रबंधन (Time Management) - विकिपीडिया
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